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एक्ज़ीमा - एक नज़र

हर किसी ने कभी न कभी खुजली का अनुभव किया होगा, जो बहुत सामान्य है, लेकिन जब यह खुजली लगातार होने लगती है और त्वचा में जलन का कारण बनती है, तो वही आगे चलकर एक्ज़ीमा में तब्दील हो जाती है।

एक्ज़ीमा जिसे डर्मेटिटिस भी कहा जाता है, यह ऐसी अवस्था होती है जिसमें मरीज़ को त्वचा में सूजन का अनुभव होता है, जिसकी पहचान त्वचा पर खुजली, लाली और फुंसियां निकलने से होती है। यह एक संक्रामक बीमारी नहीं है, अर्थात् यह एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलती।

एक्ज़ीमा न केवल एक तकलीफ़देह और दीर्घकालीन समस्या है; बल्कि कई लोगों में यह एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या और जीवन स्तर के लिए एक बड़ी परेशानी बन जाती है।

यदि त्वचा की सही देखभाल न की गई और उसका अच्छे से ध्यान न रखा गया तो यह बीमारी बहुत बढ़ सकती है, जो काफ़ी खुजलाहट और परेशानी का कारण बनती है।

कुछ तथ्यपरक बातें

  • एक्ज़ीमा किसी भी तरह के त्वचा रोग (डर्मेटिटिस) या ‘खुजली वाले चकत्ते’ के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक सामान्य शब्द है।
  • तनाव तथा अन्य भावानात्मक विकार एक्ज़ीमा को बदतर बना देते हैं।
  • एक्ज़ीमा की वजह से त्वचा संबंधी कई अन्य बीमारियां हो सकती हैं, जैसे त्वचा का संक्रमण, नींद ना आने की और व्यवहार संबंधी परेशानियां आदि। 
  • एक्ज़ीमा एक दीर्घकालिक रोग है जो अचानक तेज़ी से फैलता है और फिर घट जाता है।

एक शोध से पता चला है कि होम्योपैथी अन्य परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों की तुलना में बिना किसी दुष्प्रभाव के एक्ज़ीमा से काफ़ी राहत दिलाती है। डॉ. बत्रा’ज™ में हमें लगभग 35 सालों से एक्ज़ीमा के मरीज़ों के बीच 93% की ग्राहक संतुष्टि दर से एक्ज़ीमा के मरीजों का इलाज करने का व्यापक चिकित्सकीय अनुभव प्राप्त है (जिसे अमेरिकी गुणवत्ता निर्धारकों द्वारा प्रमाणित किया गया है)।

एक्ज़ीमा के बारे में विस्तृत जानकारी

त्वचा में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन को एक्ज़ीमा कहा जाता है, जिसकी वजह से खुजली, त्वचा पर लाली और फोड़े/फुंसियां दिखाई देती हैं। आम तौर पर पूरी दुनिया के लगभग 20% बच्चों और 1 से 2% वयस्कों को इससे प्रभावित देखा गया है। इसी तरह यह किसी भी उम्र के लोगों को परेशान कर सकता है, हालांकि, शिशुओं में यह बीमारी अधिक होती है। आम तौर पर शिशुओं का एक्ज़ीमा तीन वर्ष की आयु तक अपने-आप चला जाता है, पर कुछ मरीज़ों में उनके वयस्क होने पर भी बना रह सकता है। यह स्थिति स्त्री-पुरुष दोनों में होती है।

हालांकि एक्ज़ीमा एक प्राणघातक समस्या नहीं है, लेकिन मरीज़ के जीवन पर उसका गहरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही, मरीज़ को अन्य कई समस्याओं जैसे इसकी वजह से होने वाली परेशानी, अपनी छवि के नुकसान, बीमारी की प्रकृति के बारे में चिंता आदि का सामना करना पड़ सकता है, चिकित्सक को इलाज के दौरान इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए।

बीमारी के लक्षण बिगड़ते जाने से लेकर अपने आप फिर कुछ बेहतर भी होते रहते हैं, जिससे कई मरीज़ों का इलाज करना बहुत जटिल हो जाता है। हालांकि लक्षण कितने भी जटिल हों, बीमारी के बारे में जितनी जल्दी पता चल जाता है और उसका सही तरीके से इलाज किया जाता है तो मरीज को इससे जुड़े परेशानी पैदा करने वाले लक्षणों से राहत मिल सकती है।

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