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मुँहासों - कारण

मुँहासे से पीड़ित लोग अक्सर सोचते हैं: "दुनिया के इतने सारे लोगों में यह मुझे ही क्यों हुआ?"

कई लोगों ने यह बताने का प्रयास किया है कि क्यों मुँहासे कुछ लोगों में होते हैं और बाकी लोगों में नहीं। हालांकि मुँहासे का सही कारण क्या है, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है।

हालांकि हम इस बारे में ज्यादा नहीं जानते कि यह "क्यों" होता है, लेकिन हम इतना जानते हैं कि "कैसे" होता है। मुँहासे कैसे विकसित होते हैं इसके बारे में नीचे बताया गया है:

हमारी त्वचा के छिद्रों (बाल रोम) तैल ग्रंथियों से बहुत ही निकटता से जुड़े होते हैं जिन्हें 'वसामय ग्रंथियां' कहते हैं, जिनसे सीबम निकलता है। सीबम एक तैलीय पदार्थ है जो हमारे बालों एवं त्वचा को चिकनाई प्रदान करता है।

सीबम स्रावित होने पर उसके साथ-साथ त्वचा की मृत कोशिकाओं को भी रोमकूप के ऊपरी भाग से बाहर निकाल दिया जाता है। कभी-कभी, जब बहुत अधिक सीबम निकलता है तो यह एक जगह जमा हो जाता है जिसके कारण रामकूप बंद हो जाते हैं।

रोमकूप अवरुद्ध हो जाने पर सीबम या त्वचा की मृत कोशिकाएं रोमकूप से निकल नहीं पाती। जिसके कारण रोमकूपों के आस-पास सूजन हो जाती है जिसके चलते मुँहासे हो जाते हैं। साथ ही रोमकूपों के अंदर जीवाणु भी पनप सकते हैं जिनकी वजह से मवाद बन जाता है।

नीचे उन सबसे सामान्य कारणों को बताया गया है, जिनसे सीबम के निर्माण में वृद्धि होती है जिसके कारण अंततः मुँहासे होने लगते हैं:

  • हार्मोन - महिला और पुरुष दोनों में पाए जाने वाले हार्मोनों के कारण मुँहासे बनने लगते हैं। इन हार्मोनों द्वारा निर्मित अधिक तेल बालों के रोमों को अवरूद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महिलाओं में यौवन, मासिक धर्म, गर्भावस्था, गर्भनिरोधक गोलियों के उपयोग और रजोनिवृत्ति के समय हार्मोन संबंधी बदलाव होते हैं, और इनमें से प्रत्येक कारण से मुँहासे होने की संभावना रहती है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम भी मुँहासे का एक आम कारण है।
  • वंशानुगत - आनुवंशिकता मुँहासों के बनने और बने रहने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • दवाएं - कुछ दवाओं के उपयोग से कुछ लोगों में गंभीर रूप से मुँहासे होने लगते हैं।
  • तनाव - तनाव से आए बदलावों का कई सदियों से अध्ययन किया गया है और हार्मोन संबंधी बदलावों को तनाव का परिणाम माना गया है जिनसे मुँहासे हो सकते हैं।
  • जीवाणु - मुँहासे से पीड़ित लोगों में मुँहासे रहित लोगों की तुलना में त्वचा के ऊपरी भाग में अधिक जीवाणु पाए जाते हैं।
  • आहार – इसके बारे में पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता कि आहार का प्रभाव मुँहासे बनने में होता है या नहीं। इसके बारे में त्वचा विशेषज्ञों की राय के साथ ही इस रोग से पीड़ित लोगों की राय में काफ़ी भिन्नता है। हालांकि, कुछ रोगियों में बहुत अधिक मसालेदार भोजन, कैफीन, अत्यधिक मिठाई, शराब, चॉकलेट, लाल मांस, कॉर्न, ग्लूटीन आदि के सेवन से मुँहासे में वृद्धि देखी गई है।
  • सौंदर्य प्रसाधन - कुछ सौंदर्य प्रसाधनों के लंबे समय तक उपयोग से मुँहासे हो सकते हैं। चेहरे पर लगाए जाने वाले क्रीम, फाउंडेशन क्रीम, ओवरनाइट क्रीम और नमी प्रदान करने वाले क्रीम आदि लिपस्टिक और ब्लस-ऑन से अधिक नुकसानदायक माने जाते हैं।

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