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होम्योपैथी - सिद्धांत

होम्योपैथी के मुख्य सिद्धांतों को प्रस्तुत करने का विचार हमारे मरीजों और पाठकों को इस बात से अवगत कराना है कि हमारे चिकित्सकों द्वारा आपको दिया गया इलाज होम्योपैथी के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है। महत्वपूर्ण होम्योपैथिक सिद्धांतों की चर्चा नीचे की गई है जो इलाज प्रदान करने में हमारे चिकित्सकों का मार्गदर्शन करते हैं।

सिद्धांत 1: समानताओं का नियम या एक समान चीजें एक समान चीजों को ठीक करती हैं (लाइक क्योर्स लाइक्स) (होम्योपैथी का मूल नियम)

“एक ऐसा पदार्थ जो कृत्रिम रूप से एक स्वस्थ व्यक्ति पर कुछ बीमारी-जैसे लक्षण पैदा कर सकता है; केवल वही पदार्थ इसी तरह की बीमारी को ठीक कर सकता है जब इसे मरीज को होम्योपैथिक दवा के रूप में दिया जाता है।”

व्याख्या:

  • हमारे होम्योपैथिक चिकित्सक आपकी शिकायतों और लक्षणों का पूरा विवरण रिकॉर्ड करेंगे और उसे समझेंगे।
  • फिर वे हजारों होम्योपैथिक दवाओं से आपके लक्षणों का मिलान करेंगे और सिर्फ एक दवा का चयन करेंगे जो आपकी शिकायतों से सबसे अधिक मेल खाती है।
  • चयनित दवा वह है जो एक स्वस्थ व्यक्ति में ठीक आपके जैसे लक्षण उत्पन्न करने में प्रभावशाली सिद्ध हुई है।
  • इसके अलावा, यह दवा आपके जैसी बीमारियों वाले मरीजों का इलाज करने में कार्यकुशलता सिद्ध की गयी होनी चाहिए।

सिद्धांत 2: अनेक शिकायतों के लिए एकमात्र दवा

“एक अकेली ऐसी दवा से किसी व्यक्ति का पूरी तरह से इलाज करना जो उसकी सभी बीमारियों में सबसे अधिक समान है।”

व्याख्या:

  • एलोपैथी में, आपको प्रत्येक बीमारी के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ मिल जाते हैं और अनेक शिकायतों के लिए अंततः आप एक से अधिक चिकित्सक से परामर्श कर सकते हैं। इसमें एक हृदय रोग विशेषज्ञ, मधुमेह विशेषज्ञ, त्वचा विशेषज्ञ आदि होते हैं।
  • होम्योपैथिक चिकित्सकों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। वे एक अकेली ऐसा दवा का चयन करेंगे जो आपकी सभी स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करेगी या उनमें राहत देगी।
  • उदाहरण के लिए, अगर आप बालों के झड़ने की शिकायत के लिए हमारे चिकित्सक से परामर्श करते हैं और उनको बताते हैं कि आपको सिरदर्द और एसिडिटी की भी शिकायत है, तो वे एक ऐसी दवा बताएंगे जो आपके बाल झड़ने की शिकायत का ध्यान रखेगी और साथ ही सिरदर्द एवं एसिडिटी से भी राहत प्रदान करेगी।

सिद्धांत 3: व्यक्तिकरण

“किसी भी दो मरीज को एक ही दवा नहीं दी जाती है भले ही उनको एक समान बीमारी हो सकती है।”

व्याख्या:

  • प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वभाव और मनोदशा के मामले में अनन्य है। यहाँ तक कि एक ही बीमारी से पीड़ित अलग-अलग लोगों के लक्षण अलग-अलग होते हैं।
  • एलोपैथी में, एक ही बीमारी से पीड़ित हर व्यक्ति को एक समान दवा बतायी जा सकती है।
  • हालांकि, होम्योपैथी में दवा का चयन करना पूरी तरह से इस आधार पर नहीं होता है कि आप कौन सी बीमारी से पीड़ित हैं बल्कि यह आपके लक्षणों की चारित्रिक विशेषताओं और एक व्यक्ति के रूप में आपके ऊपर कहीं अधिक निर्भर करती है।
  • होम्योपैथी आपके स्वभाव, मनोदशा, पसंद और नापसंद पर विचार करती है जो आपके मामले में विशेष हैं, इस प्रकार आपके समान बीमारी से पीड़ित अन्य व्यक्तियों से आपको अलग करके देखा जाता है।

सिद्धांत 4: दीर्घकालिक परिणाम

“ऐसी क्रीम या दवा के प्रयोग से अपने त्वचा विकारों और अन्य संबद्ध शिकायतों का इलाज करना जो लक्षणों में अस्थायी रूप से राहत देती है लेकिन आंतरिक रूप से आपका इलाज नहीं करती है, इसे बीमारी को दबाना (सप्रेशन) कहा जाता है। यह भविष्य में अधिक गंभीर बीमारियों के विकसित होने का कारण बनता है।”

व्याख्या:

  • डॉ. हनीमैन ने देखा कि अगर आपकी त्वचा की समस्याओं का इलाज बाहर से क्रीमों का प्रयोग करके किया जाता है तो लक्षण अस्थायी रूप से गायब हो सकते हैं लेकिन भविष्य में अधिक गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
  • बीमारी को दबाने (सप्रेशन) से आपकी बीमारी अस्थायी रूप से दूर हो सकती है लेकिन आपको अधिक गंभीर बीमारियां विकसित होने के उच्चतर जोखिम में डाल सकती है।
  • आपकी केस हिस्ट्री (होम्योपैथिक परामर्श) पर काम करते हुए, हमारे चिकित्सक आपसे उन सभी स्वास्थ्य समस्याओं पर चर्चा करेंगे जिनका आपने बचपन से लेकर अब तक सामना किया है। वे आपसे यह पूछेंगे कि अतीत में आपने कौन से उपचार लिए हैं और उन उपचारों के परिणाम क्या हैं।
  • इसके साथ चिकित्सक यह जान पाएंगे कि क्या अब आप जिस समस्या से पीड़ित हैं और जिनका आपने अतीत में सामना किया है उनके बीच कोई संबंध है, और आपकी वर्तमान स्वास्थ्य समस्या को विकसित करने में आपके पिछले उपचार ने क्या भूमिका निभायी है।
  • मामले का विस्तृत अध्ययन करने के बाद बतायी गयी दवा का उद्देश्य आपकी बीमारी को ठीक करना होता है, न कि सिर्फ लक्षणों को दबा देना।

सिद्धांत 5: चिकित्सा का अनुक्रम

“किसी भी उपचार के बाद, आपका स्वास्थ्य कभी भी हल्की बीमारियों से अधिक गंभीर बीमारियों की तरफ नहीं बढ़ना चाहिए। प्रकृति के नियम के अनुसार इलाज का एक निर्धारित अनुक्रम होना चाहिए।”

व्याख्या:

  • एक होम्योपैथिक चिकित्सक यह समझने में हमेशा इस सिद्धांत से निर्देशित होता है कि क्या इलाज से मरीज को मदद मिल रही है या यह उसे भविष्य में अधिक गंभीर बीमारियों के जोखिम में डाल रहा है।
  • जब किसी शिकायत के लिए आपका इलाज किया जा रहा है, तो इसकी तीव्रता और आवृत्ति में कमी आनी चाहिए।
  • किसी भी उपचार के बाद, आपका स्वास्थ्य कभी भी हल्की बीमारियों से अधिक गंभीर बीमारियों की ओर नहीं बढ़ना चाहिए।
  • होम्योपैथी आपका सिर्फ बाहर से नहीं बल्कि भीतर से इलाज करती है। प्रकृति के नियम के अनुसार, इलाज एक निर्धारित अनुक्रम में होना चाहिए। हमारे चिकित्सक इन सिद्धांतों के अनुसार आपके उपचार के परिणाम का आकलन करने में काफी प्रशिक्षित होते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि आपका इलाज सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।    

सिद्धांत 6 – न्यूनतम खुराक

“दवा की खुराक और पुनरावृत्ति न्यूनतम होनी चाहिए जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उपचार सुरक्षित और दुष्प्रभावों से मुक्त है।”

व्याख्या:

  • होम्योपैथिक दवाएं कोई दुष्प्रभाव उत्पन्न नहीं करती हैं।
  • तनुकरण (डाइल्यूशन) विधि नामक प्रक्रिया द्वारा होम्योपैथिक दवाएं तैयार करने में काफी सावधानी बरती जाती है। दवा तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया गया तत्व पानी या मेडिकेटेड अल्कोहल में घुल जाता है।
  • तनुकरण (डाइल्यूशन) एक क्रमिक तरीके से उस स्तर तक किया जाता है जहाँ मूल तत्व का केवल एक सूक्ष्म अंश मरीज को दी जाने वाली वास्तविक दवा में शेष रह जाता है। तनुकरण की यह विधि इतनी परिष्कृत होती है कि इसमें औषधीय पदार्थ का कोई मापने योग्य अंश ढूँढना मुश्किल होता है।
  • नैनोटेक्नोलॉजी में नवीनतम प्रगति और भारत में इंजीनियरिंग एवं अनुसंधान के एक प्रतिष्ठित संस्थान, आईआईटी मुंबई द्वारा किये गए प्रयोगों में होम्योपैथिक तनुकरण में न्यूनतम मात्राओं में मूल तत्व की उपस्थिति को दर्शाया गया है। 

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