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कब्ज़- रोग का निदान

इसका निदान निम्नलिखित आधार पर होता है:

  • चिकित्सकीयइतिहासऔरशारीरिकपरीक्षण:हमारेचिकित्सकोंकेलिएवेमरीज़केकब्ज़के सटीक लक्षणों कोसहीतरीकेसेजानना बहुतमहत्वपूर्ण होता है।इसके अलावा हमारेचिकित्सकमरीज़केपेटके निचलेभाग काशारीरिकपरीक्षणकरकेपतालगातेहैंकिउसकापाचनकैसाहैऔरमलकितना कड़ायाजमाहुआहै।
  • मनोवैज्ञानिकआकलन: कब्ज़कासंबंधकाफी हद तक मानसिकअस्थिरतायाजीवनकीपरिस्थितियोंसेभीहोताहै।मामलेकीपूरीजाँचकरनेपरहमारेचिकित्सकइन कारणोंकापतालगातेहैं।
  • जांच-पड़ताल : रक्तकीनियमितजाँचसेहार्मोन संबंधी बदलावोंकापताचलताहैऔरमलमें खून कीजाँच करने के लिए मल का परीक्षण किया जाता है।

समस्याएं/जटिलताएं

बवासीर:यह कब्ज़कीयहसबसेआमसमस्याहै।

गुदा का फिशर : fमलाशयकीदीवारोंपरदरार (फिशर) उत्पन्न हो जाती है जिससे मरीज को दर्दऔरऔर असहजमहसूस होता है।तकलीफ़तबबढ़जातीहैजबवेसूखजातेहैंऔरकड़ामलनिकलताहै।

मल संबंधी दबाव: मल पर दबाव पड़ने के साथ कई बार अनेक प्रकार की अन्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं, जैसे मलाशय पर सूजन, मल त्यागने की इच्छा न होना और मूत्र त्याग पर नियंत्रण न रह पाना या गुदा का बाहर निकल आना।

मनोवैज्ञानिकसमस्याएं:

  • मनोभावोंकाप्रभावितहोना, यानी चिंताऔर चिड़चिड़ापन;
  • इन समस्याओं केकारणसमाजसेकटजाना;
  • रोज़मर्रा कीगतिविधियोंमेंरुकावट आना;और
  • स्वास्थ्यपरबुराप्रभाव।

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